Operation Mahadev: कांच खाने वाले ‘रेड डेविल्स’ कौन हैं? जानिए उन 4 बहादुर जवानों की कहानी जिन्होंने आतंकियों को मौत के घाट उतारा

Operation Mahadev सिर्फ एक मिशन नहीं था यह भारत की वीरता, अनुशासन और सटीकता का जीवंत उदाहरण था। इस मिशन को अंजाम देने वाले थे भारतीय सेना की 4 Para (स्पेशल फोर्स) के कमांडो जिन्हें पूरी दुनिया “रेड डेविल्स” के नाम से जानती है। ये वो जांबाज हैं जिन्हें ट्रेनिंग के दौरान कांच चबाना, बर्फ में बिना कपड़ों के बैठना, और बिना नींद के 72 घंटे तक लड़ना सिखाया जाता है।

जब देश 22 अप्रैल 2025 के पहलागाम आतंकी हमले से हिल गया था, तब इन्हीं रेड डेविल्स ने सिर्फ 3 घंटे में आतंक के तीन सिरों को मिटाकर भारत की तरफ से जवाब दिया।

कौन हैं ‘रेड डेविल्स’?

भारतीय सेना की 4 पैरा (स्पेशल फोर्स) यूनिट को सेना की सबसे घातक और उच्च-स्तरीय मिशन यूनिट माना जाता है। इनका उपनाम ‘रेड डेविल्स’ है जो इनके साहस, दृढ़ता और अटूट मनोबल का प्रतीक है।

इनकी टैगलाइन ही इन्हें बाकी सब से अलग बनाती है:

“Men Apart – Every Man an Emperor” (अलग लोग – हर सैनिक एक सम्राट)

4 पैरा के कमांडो सिर्फ शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी अजेय बनाए जाते हैं। ये वो जवान हैं जो सीधी मुठभेड़, हाई-ऑल्टिट्यूड वॉरफेयर, और सीक्रेट मैनहंट मिशन में निपुण होते हैं।

Operation Mahadev में इनका योगदान

28 जुलाई 2025, श्रीनगर के नौहट्टा क्षेत्र में ऑपरेशन महादेव की शुरुआत हुई। सबसे आगे थे 4 पैरा स्पेशल फोर्सेस के जांबाज।

इन वीर सैनिकों ने:

  • आतंकियों की सटीक लोकेशन का पता लगाया।
  • बिना किसी नागरिक को नुकसान पहुंचाए मिशन पूरा किया।
  • सुलेमान उर्फ फैज़ल जट्ट, हामजा अफगानी और जिब्रान तीनों खूंखार आतंकियों को हेडशॉट से ढेर किया।
  • और ये पूरा ऑपरेशन 3 घंटे से भी कम समय में पूरा किया।

इनकी सटीकता और अनुशासन ने साबित कर दिया कि क्यों रेड डेविल्स भारत की सबसे भरोसेमंद स्ट्राइक यूनिट हैं।

4 Para Special Force: ट्रेनिंग और ताकत

विशेषताविवरण
स्थापना वर्ष1961 (पैरा रेजिमेंट की स्थापना; बाद में स्पेशल फोर्स बनी)
उपनामरेड डेविल्स
चयन दर90% उम्मीदवार असफल हो जाते हैं
ट्रेनिंग लोकेशनबेलगाम (कर्नाटक), नाहन (हिमाचल प्रदेश)
मुख्य कौशलस्नाइपिंग, क्लोज क्वार्टर बैटल, स्कूबा डाइविंग, पर्वतारोहण, पैराशूट जंप
पहचानछाती पर “बलिदान” बैज और लाल बेरट

इन कमांडोज़ को हर तरह की परिस्थिति के लिए तैयार किया जाता है चाहे वह 12,000 फीट की ऊँचाई हो या घना जंगल, या फिर रात का अंधेरा बिना GPS के। हर मिशन में उनका एक ही उसूल है “Zero Failure Tolerance” यानी असफलता का कोई विकल्प नहीं।

क्यों हैं 4 Para खास

4 पैरा कमांडो पूरी तरह गति, गुप्तता और गौरव के प्रतीक हैं। हर सैनिक “बलिदान” के अर्थ को जीता है — देश के लिए सब कुछ समर्पित करने को तैयार।
वे किसी भी मौसम, भूभाग या दुश्मन से हार नहीं मानते।
उनका फोकस सिर्फ एक होता है “मिशन पूरा करो, चाहे जो भी हो।”

राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: देश की नज़रें इन्हीं पर

जब रेड डेविल्स मैदान में दुश्मन का सफाया कर रहे थे, तब देश के भीतर 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर चर्चाएं तेज़ थीं। लाखों सरकारी कर्मचारी सैलरी बढ़ोतरी की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन इन्हीं बहादुर सैनिकों ने यह दिखाया कि सच्ची सेवा तनख्वाह से नहीं, त्याग से होती है।

निष्कर्ष: ऑपरेशन महादेव केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं थी यह भारत की स्पेशल फोर्सेस की अदम्य शक्ति और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक थी। 4 पैरा के रेड डेविल्स ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जब भारत की सीमाएं पुकारती हैं, तो ये वीर बिना सवाल किए दुश्मन को उसके ही अंदाज़ में जवाब देते हैं।

“जब तिरंगा बुलाता है, रेड डेविल्स सिर्फ जवाब नहीं देते विजय लेकर लौटते हैं।”

डिस्क्लेमर: यह लेख ऑपरेशन महादेव से जुड़ी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्ट्स और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। सुरक्षा कारणों से कुछ जानकारी सांकेतिक या सीमित रूप में प्रस्तुत की गई है।

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